मंगळवार, २६ डिसेंबर, २०१७

कशमकश

कभी कभी बहुत कशमकश में फँस जाता है दिल । मुद्दतों से जो पाना चाहा हो और एक बार भी ख्वाहिश का जिक्र तक न किया हो वो अचानक से आपकी जिंदगी मे आ जाए  और सिर्फ आए नहीं बल्कि  आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाए तो हैरत तो होगी ही।  असली दुविधा तो ये है कि अब तक  आपकी जिंदगी  सलीके से एक पटरी पर बैठ चुकी होती है । उसमें सिंगल ट्रॅक होता है ।और ट्रॅक बदलने की न सुविधा होती न गुंजाइश ।लेकिन दिल एक मनचला और जिद्दी  ड्राईवर है जिसके हाथों में ये गाडी दे दो तो बस मनचाहा सफर सामने देख कर पटरी बदलने की कोशिश करता है ।
     लेकिन असली कशमकश तो तब होती है जब दिमाग भी  उतना ही समझदार  और जिद्दी हो । वो जानता है कि जो लौट आया है  जिंदगी मे  ( खैर लौट आना भी तब कहलाता जब वो पहले  आपके पास होता ) वो भले ही दिखता लुभावना हो मगर कहीं किसी मंजर पर दर्दनाक साबित हो सकता है ।शायद कोई मृगजल हो।  शायद कोई छलावा । जो आपकी शांत ठहरी जिंदगी मे कोई सैलाब लाने के लिए  आया हो।
वरना सोच के तो देखे ये दिल कि हममें  ऐसा क्या है जो कोई अपनी जिंदगी में हमें अहम जगह दे? किसी के दिल बहलाने का अस्थाई साधन बनना बहुत शर्मनाक है। माना कि बडी ख्वाहिश थी कृष्ण का एक  अंश भी पाने की । लेकिन यदि पाना ही है तो या तो राधा बनकर, रूक्मिणी बनकर या फिर मीरा बनकर ही सही ।हजारों गोपियों के बीच मे एक बनना यदि स्वीकार होता तो तभी कोई कदम  उठाया जाता । चाँद न मिलने पर वो सितारों से रोशनी करना तो नही चाहते? तो क्या तुझे मंजूर है सितारों में एक बनना? हजारों मे से एक बनना?
मान जा ।सँभल जा। पछताएगा । छलावा, भ्रम कभी न कभी टूटता ही है और जब टूटता है तो बडा दर्द देता है। माना कि आज तुझे महसूस हो रहा है कि कुछ मायने हैं तेरे वजूद के उनके लिए, पर पगले कोहरे को छँटने तो दे। साफ तस्वीर दिखने तो दे।  अभी हिजाब मे है बहुत कुछ। खुलकर सामने आने तो दो । कुछ आजमाईश हो कुछ जाँच परख हो तभी तो रिश्ते की असली सूरत और शिद्दत समझ मे आए। कितना लंबा सफर है ये भी जाना जाए ।

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