वैसे तो मैं ये अपनी मातृभाषा में बेहतर लिख सकती थी लेकिन चूंकि अब राष्ट्रीय स्तर पर दोस्त हैं तो उनमे से कुछ अजीज दोस्तों की फरमाइश पर हिंदी में ही सही. पहले तो मुझे इस टाइटल के बारे में बताना पड़ेगा अपने गैरमराठी दोस्तों को. महाराष्ट्र में जब लड़की का विवाह हो जाता है तो उसके नाम के आगे सौभाग्यवती लग जाता है, जैसे और जगहों पर श्रीमती लगता है. और जब तक वो सुहागन है ये उपाधि उसके साथ रहती है क्योंकि पति की मृत्यु या फिर तलाक के बाद वह दुर्भाग्यवती बन जाती है शायद.
शादी के पहले कुमारी, शादी के बाद पति के साथ होने तक सौभाग्यवती.
जब से मैंने अपने आसपास देखना शुरू किया है तबसे ऐसे कुछ किस्से , ऐसी कुछ घटनाएं सामने आयीं की इस टाइटल के बारे में दिल में सौ प्रश्न उठने लगे. मेरी कुछ रिश्तेदार, मेरी कुछ सहकर्मी, और मेरी कुछ अजीज दोस्त, इनके साथ घटी घटनाएं.
मेरी एक ममेरी बहन है जिसकी शादी उसके किसी रिश्तेदार से हुई थी. शादी के १० साल तक भी वो अपनी पत्नी को कोई सुख नहीं दे पाया क्योंकि उसका दिल कहीं और लगा था शायद. और फिर उसने अपनी उस प्रेमिका के साथ खुदखुशी कर ली. इसका सारा दोष मेरी बहन के सिर आया. क्योंकि ये उसका दुर्भाग्य था. खैर वो सौभाग्यवती बनी थी तो फिर उसने ये दिन क्यों देखा?
मेरी एक सहकर्मी जिसके माता पिता ने उसे अच्छे से पढ़ाया लिखाया ताकि वो किसी डॉक्टर की सौभाग्यवती बने. अच्छा घर, अच्छा लड़का, एक बेटा भी हुआ. और दूसरे की उम्मीद थी , तभी पति से कोई व्यावसायिक दुर्घटना हो गई, और उसने अपनी जान लेली. वो अकेली जो अब सौ. नहीं रही थी २ बच्चों के साथ ज़िन्दगी से झूझ रही थी. लेकिन उसका दूसरी शादी करना उसके खानदानी रिश्तेदारों को मंजूर नही था.
मेरी एक अच्छी दोस्त को शादी के ६ महीने बाद पता चला की उसके पति का बाहर कोई अफेयर है. फिर भी वो सौभाग्यवती? दूसरी मेरी एक दोस्त. उच्च शिक्षित. लेकिन शादी के बाद पता चला की उसके साथ धोका हुआ है, पति व्यसनाधीन है. बीमार है. फिर भी वो सौभाग्यवती ही कहलाएगी क्योंकि पति है. और उसके एक साल बाद पति के गुजरते ही वो सिर्फ दुर्भाग्यशाली नहीं अशुभ भी बन गई. (अगर महाराष्ट्र में किसी गांव या छोटे शहर में होती न वो तो न अपने पसंद के कपडे गहने पहन पाती , न किसी शुभ कार्य में शामिल हो पाती ). शायद सभी जगह यही हालात हों आज के अंतरिक्ष युग में भी. यहाँ तो मैंने यही देखा है. की जो लड़की पति से मिलने से पहले बिंदी, गहने पहन सकती थी वो उसके जाने के बाद नहीं पहन सकती? वह इतनी अशुभ कैसे हो गई. उसने तो नहीं चाहा था अपनी ज़िन्दगी में इस तरह की घटना का होना. उसे तो ये तिरस्कार , ये अपमान कभी भी मंजूर नहीं था. फिर भी ये उसके हिस्से में आता है.
मैं हैरान इस बात से हूँ की किसी औरत को शादी के बाद कितना भी दुष्ट, व्यसनाधीन, मारपीट करने वाला, पशुतुल्य व्यवहार करने वाला पति मिला हो. उसकी ज़िन्दगी चाहें नरक बन गई हो फिर भी वो सिर्फ इसलिए सौभाग्यवती है क्योंकि उसका पति है. और पति के मारने या अलग होने के बाद वो चाहे जितनी भी सुखी हो जाये सौ. नहीं है. 😞😞 कुछ पति तो ऐसे भी देखे हैं जो पत्नी के चरित्र पर शक करके उन्हें जान से ही मार देते हैं. क्योंकि चरित्रहीनता व्यक्तिसापेक्ष है. अगर उनके साथ किसी और औरत के सम्बन्ध हों तो मर्दानगी की निशानी और पत्नी के साथ कोई साफ़ सुथरी दोस्ती भी करे तो चरित्रहीनता. और इस तरह के व्यवहार करने वाले लोग सिर्फ अनपढ़ गंवार, पिछड़ी मानसिकता के लोग हैं ऐसा कटाई मत सोचियेगा, इसमें सूट बूट वाले सरकारी अधिकारी, उच्च शिक्षित, उच्चपदस्थ लोग भी शामिल हैं.
एक लड़की अपना पूरा घर परिवार छोड़कर, इनका घर बसाने आती है. इनकी और घरवालों की सेवा करती है ऊपर से दान दहेज़ भी देना है इन लोगों को बेटी के साथ. ( शादी का सौदा भी अजीब है न ? अपने दिल का टुकड़ा भी दो और कीमत भी दो) और उसपर ये व्यवहार.
ज्यादा हैरानी इस बात की होती है की पति चाहे देवता हो या या दानव, उसके जाने का कुछ दुःख तो उसकी पत्नी को होगा. शायद थोड़ा काम या ज्यादा. उसके दुःख को कम करने के बजाय हमारे समाज की स्त्रियां ही उन्हें ज्यादा से ज्यादा चोट पहुँचाने की कोशिश करती हैं. " देखो उसे, उसने फूल लगाए बालों में, उसने पायल पहन ली. उसने अच्छी साडी पहन ली. वो शुभ कार्य में, त्यौहार में आ गई. ये तो अपशकुन हो गया. "
मैंने अपनी कुछ पड़ोसिनों से कहा भी कि देखिये वो जो भी कर रही है ये उसका निजी मामला है, इससे न तो आपको कोई तकलीफ होनी चाहिए, न ही आप पर कोई बोझ पड़ने वाला है. वो अपने बल पर और अपने परिवार की मर्जी से कर रही है तो बेकार समय न बर्बाद करें. कुछ अच्छी बातें कर अपनी जुबान साफ़ रखे , कुछ नया सीखें, कुछ नया सिखाएं. कुछ बहने समझ गई. कुछ नहीं।
इस सबका सारांश सिर्फ इतना है की अगर पत्नी के आने पति के अस्तित्व में कोई फर्क नहीं माना जाता तो हमें यही बात एक स्त्री के लिए भी सोचनी चाहिए. ईश्वर ने तो सबको एक जैसा बनाया है.
सोचिये की ये टाइटल किसके लिए होना चाहिए और इसका मतलब क्या है. सिर्फ पति होना सौभाग्य नहीं ,अच्छा समझदार जीवनसाथी होना भी जरूरी है इसके लिए.